Wednesday, February 13, 2013



असली ताकत कहानी में होती है
अपनी पहली फिल्म 'ए वेडनसडे' में अपने निर्देशन व कहानी लेखन का लोहा मनाने वाले नीरज पाण्डेय इस बार लेकर आये हैं 'स्पेशल 26 '। इस फिल्म के साथ भी उनकी छवि बरकरार है और उन्होंने यह भी साबित किया है वह उन चुनिंदा निर्देशकों में से हैं जो कि रीमेक और परिहास के अलावा भी अच्छी व मूल कहानियों के साथ फिल्म बनाने में अटूट विश्वास रखते हैं ।


 'स्पेशल 26' वर्ष 1987 में घटी सच्ची घटनाओं पर आधारित है, जब मौन सिंह नाम के एक शख्स ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर नकली सीबीआई अफसर बनकर देश के कई शहरों में रेड डाली थी और करोड़ों का माल लेकर चंपत हो गया था। नीरज पाण्डेय ने इस घटना को बहुत बेहतरीन तरीके से रुपहले परदे पे उतरा है और वास्तविकता के काफी करीब लाकर खड़ा किया है। कई समय के बाद गंभीर भूमिका में नज़र आने वाले अजय यानी अक्षय कुमार ने अच्छा अभिनय किया है। फिल्म के लिए कम मेहनताना लेना उनकी भूमिका व कहानी के साथ जवाब देता है। अनुपम खेर का संवाद 'असली ताकत दिल में होती है' उनके अभिनय कि परिपक्वता कि ताकत को बखूबी दिखता है। जिमी शेरगिल और दिव्या दत्ता ने अपने पात्र के साथ न्याय किया। लेकिन अपनी हर फिल्म कि तरह इस फिल्म में भी  मनोज वाजपेयी का अभिनय सबसे उम्दा नज़र आता है।
फिल्म के अगर और विभागों कि बात करें तो इसका बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म के साथ समकालीन चलता दिखता है। फिल्म का संगीत काफी बढ़िया है जो हिमेश रेशमिया को एक बार दोबारा यही याद दिलाता है कि वह इसी क्षेत्र के लिए बने हैं।
यदि फिल्म कि कहानी कि बात करें तो प्रोमो के हिसाब से साफ़ पता चल रहा था कि ये फिल्म असली व नकली सीबीआई के अस्तित्व कि जंग को दिखाएगी और पहले के मध्यांतर तक ये काफी हद तक सही भी साबित होती है लेकिन मध्यांतर के बाद फिल्म पूरी तरह से बदल जाती है ।
कुल मिलाकर यह एक बेहतरीन फिल्म है जो हिंदी सिनेमा में बहुत कम देखने को मिलती हैं। फिल्म का चरमोत्कर्ष (क्लाइमेक्स) सही मायने में चरमोत्कर्ष (क्लाइमेक्स) कहलाने के लायक है क्योंकि यह आपके सोच से परे जाकर फिल्म को बदल कर रख देता है । मुझ जैसे हर उस शख्स व वर्ग के लिए यह एक उत्कृष्ट फिल्म है जो थ्रिलर व परिहास के अलावा गंभीर व वास्तविकता दिखाने वाली फिल्मो के शौक़ीन हैं।